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मुंबई. यहां की शीतल भाटकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित गरीब बच्चों के लिए एक एनजीओ चलाती हैं। उनकी संस्था ‘विद आर्या’ गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब बच्चों को चिंहित कर उनके दवा और भोजन का इंतजाम करती है। बता दें कि साल 2015 में शीतल और उनके पति विक्रांत ने अपने सात साल के बेटे आर्या को ‘स्टोरेज डिसऑर्डर’ नाम की एक घातक बीमारी के चलते खो दिया।

बेटे को बचाने के लिए शीतल और विक्रांत ने काफी पैसा लगाया, लेकिन वो बेटे को बचा नहीं सके। शीतल ने DainikBhaskar.com से बातचीत में अपने पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर किए और अपने एनजीओ के बारे में भी बताया।

बेटे को खोने के बाद लिया ये संकल्प

शीतल बताती हैं- “बेटे की बीमारी के दौरान मैं कई मुश्किलों से गुजरी। मैंने उस दौरान अनुभव किया कि अब भी हजारों ऐसे बच्चे हैं जिनकी गंभीर बीमारियों से मौत हो जाती है, लेकिन उनके घरवालों को पता नहीं चलता के हमारे बच्चे को हुआ क्या था। उनके लिए परिवार का पेट भरना भी मुश्किल हो जाता है। इलाज के बारे वो सोच भी नहीं पाते।”

शीतल भाटकर बताती हैं कि “बेटे की मौत ने मुझे झकझोर कर रख दिया। 20 फरवरी, 2015 को मैंने अपना बेटा खो दिया। बेटे की मौत के बाद मैं बिलकुल टूट सी गई थी, लेकिन मुझे वो बच्चे भी याद आ रहे थे जो बीमारी से लड़ भी रहे थे और साथ ही पेट भरने के लिए दूसरों से रोटी भी मांग रहे थे। फिर मैंने अपने पति के साथ मिलकर एक संस्था ‘विद आर्या’ बनाई। जिसका काम ही ऐसे बच्चों की मदद करना है जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।”